गर्भधारण के दौरान मितली: कारण और प्रबंधन

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गर्भावस्था के दौरान मितली आना

मितली और उलटी कई बार एक साथ आती है |गर्भावस्था के दौरान मितली आने की समस्या को अंग्रेजी में “मॉर्निंग सिकनेस” के नाम से जाना जाता है लेकिन यह जरुरी नहीं की गर्भावस्था के दौरान मितली सिर्फ सुबह में ही आये, यह दिन के किसी भी समय आ सकती है (जैसे की शाम और रात में )|

यह समस्या जरुरी नहीं की सभी गर्भवती महिलाओ में हो लेकिन कुछ गर्भवती महिलाओ में यह समस्या इतनी गंभीर हो जाती है की उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ सकता है|

अगर किसी गर्भवती महिला को सामान्य अस्तर की मितली की शिकायत है तो उसे इसके लिए दवा नहीं लेनी चाहिए क्युकी ऐसा करने से इन दवाओं का शरीर पर बुरा असर होता है|

गर्भावस्था के दौरान ली जाने वाली अलग तरह की दवाएं

गर्भावस्था के दौरान ली जाने वाली दवाओं को श्रेणियों में विभाजित किया गया है जो की इस प्रकार है : ‘ए’, ‘बी’, ‘सी’, ‘डी’ और ‘एक्स’ | अगर दवा ‘ए’ श्रेणी की है तो गर्भावस्था में ऐसी दवाओं को लेना का कोई दुषप्रभाव नहीं पड़ता है उसी प्रकार अगर दवा ‘एक्स’ श्रेणी की है तो ऐसी दवा गर्भावस्था के दौरान लेना वर्जित है और इसका गर्भ पे बुरा असर पड़ता है |

अगर मितली के कारण गर्भवती महिला को खाना खाने में परेशानी हो रही है तो ऐसी स्थिति में हमें मितली रोकने के लिए दवाओं का प्रयोग कर लेना चाहिए | लेकिन अगर यह मितली पापड़, फल जैसे सेब और बिस्कुट खाने से सही हो जाये और दवा लेने की जरुरत न पड़े तो यह सबसे अच्छा है|

डॉक्टर अक्सर गर्भवती महिलाओ को यह सुझाव देते है की वह मसालेदार खाना, तला हुआ और बहार का खाना जितना हो सके परहेज करे |ऐसा करने से मितली की समस्या कम होती है| अगर ऐसा करने से भी इस समस्या का समाधान न हो तो हम महिला को हलकी दवाएं जैसे की अम्लत्वनाशक(एंटासिड ) दे सकते है जिससे की एसिडिटी नियंत्रण में रहती है |

गर्भवती महिला को मितली के लिए दवा तभी लेनी चाहिए जब उसे ऐसा लग रहा हो की मितली की वजह से वह अपना रोज का काम न कर पा रही हो या फिर उसके वजन में कमी आ गयी हो|

गर्भधारण के दौरान मितली पर भोजन के माध्यम से नियंत्रण

कम मात्रा में और ज्यादा बार भोजन करना चाहिए

गर्भावस्था के दौरान मितली की समस्या को रोकने के लिए महिला को भोजन कम मात्रा में और ज्यादा बार करना चाहिए |गर्भावस्था के दौरान खाने के बाद पेट, देर में खाली होता है इसलिए गर्भवती महिलाओ को यह सुझाव दिया जाता है की कम मात्रा में खाना चाहिए |ऐसा करने से भोजन आसानी से पच जाता है और इसलिए हर ३ घंटे में भोजन करना चाहिए |

गर्भवती महिला को ज्यादा समय तक खाली पेट भी नहीं रहना चाहिए ऐसा करने से पेट में एसिड(अम्ल) बनने लगता है |

भोजन करने के तुरंत पहले और बाद में पानी पीने से बचना चाहिए

अगर गर्भवती महिला को गंभीर रूप से मितली और उलटी आ रही है तो उसे खाने के साथ पानी नहीं पीना चाहिए |ऐसा करने से पेट अचानक से भर जाता है और इसका बाद जब उलटी होती है तो न सिर्फ पानी बल्कि खाया हुआ भोजन भी बहार आ जाता है |
इसिलए गर्भवती महिलाओ को भोजन करने के १ घाटे पहले और १ घंटे बाद ही पानी पीना चाहिए|

इसलिए हम यह कह सकते है की अपने खाने की शैली में थोड़ा परिवर्तन कर के हम इस समस्या को कम कर सकते है|

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