कूल्हों की गठिया (हिप आर्थराइटिस): लक्षण, कारण और उपचार

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कूल्हों की गठिया

हमारे कूल्हे का जोड़ एक बहुत बड़ा गेंद और सॉकेट जोड़(बॉल एंड सॉकेट जॉइंट) है |कूल्हे में गठिया की शिकायत तब होती है जब जोड़ की हड्डियों के उप्पर स्थित उपास्थि(नरम हड्डी )किसी कारणवश छतिग्रस्त हो जाती है |अक्सर देखा गया है की चोट लगने और गिरने की वजह से ही नरम हड्डी को छती पहुँचती है |

आइये हमारे स्वास्थ्य विशेषज्ञ से कूल्हे की गठिया के बारे में जानने का प्रयाश करते है:-

आइये कूल्हे की गठिया के कारण, लक्षण और उपचार के बारे में विस्तार से चर्चा करते है :

कूल्हों की गठिया का कारण

प्राथमिक ऑस्टियोआर्थराइटिस(अस्थिसन्धिशोथ) दूसरे देशो में कूल्हे की गठिया का एक सामान्य कारण है परन्तु हमारे देश में कूल्हे की गठिया ज्यादातर चोट की वजह से ही होती है |विशेष रूप से कूल्हे की हड्डी में फ्रैक्चर की वजह से ही कूल्हे की गठिया होती है |ऐसा ज्यादातर बूढ़े लोगो में ही होता है|

कूल्हों की गठिया के लक्षण

ऐसा व्यक्ति जिसे कूल्हों की गठिया है उसे कई बार तीव्र दर्द का सामना करना पड़ सकता है |जो की निम्नलिखित गतिविधियों की वजह से हो सकती है :-

  • बैठने या खड़े होने के दौरान|
  • ऐसी सीट पर बैठने का प्रयाश करना जो सामान्य अस्तर से नीचे हो|
  • चलने के दौरान शरीर का पूरा भार कूल्हे के जोड़ो पर आता है मगर गठिया के कारण यह भर हड्डी के किनारे पर पड़ता है इसके कारण तीव्र पीड़ा की अनुभूति होती है|

कूल्हे की गठियों का दर्द आमतौर पर आगे की तरफ होता है, इसका मतलब यह दर्द पेट और जांघ के बीच के हिस्से से शुरू होकर, जांघों से होते हुए पैर के घुटनो तक पहुँचता है, इसीलिए अगर एक व्यक्ति घुटनो में दर्द बताता है तो यह संभव हो सकता है की यह दर्द कूल्हे की गठिया के कारण हो रहा हो|

कूल्हों की गठिया का उपचार

कूल्हे का प्रत्यारोपण :

कूल्हों का प्रत्यारोपण एक शल्यचिकत्सिकीय प्रक्रिया है जो की कूल्हे की गठिया का आम और कारगर उपचार है |यह प्रक्रिया उन लोगो पे अपनायी जाती है जिनकी आयु ६० से ७० वर्ष की होती है या फिर उनकी गठिया का कारण कूल्हे के जोड़ की हड्डी टूटना है |यह प्रक्रिया उन लोगो के लिए भी कारगर है जिनकी गठिया प्राकृतिक कारणों हुई है |
ऐसी परिस्थितियों में जब हमे टूटी हुई हड्डी का कोण, और उसके जुड़ने की स्थिति के बारे में कुछ न पता हो तो कूल्हे का प्रत्यारोपण करना अनिवार्य हो जाता है|

टूटी हुई हड्डी को पेंच द्वारा जोड़ना

इस प्रक्रिया को ज्यादा पसंद नहीं किया जाता है क्युकी इस प्रक्रिया से गठिया पूरी तरीके से नहीं खत्म होती है|इस प्रक्रिया में काफी समस्या भी आती है जैसे टूटी हुई हड्डी के कोण की परेशानी इत्यादि |

हम यह कह सकते है की कूल्हे की गठिया, कूल्हे के जोड़ो में हुई टूट-फूट के कारण होती है और यह टूट-फूट प्राकृतिक रूप से या फिर चोट के कारण हो सकती है |इस गठिया का इलाज कूल्हे का प्रत्यारोपण कर के किया जा सकता है |

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