एक हफ्ते में कितनी बार हस्थमैथुन कर सकते है ??

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हस्थमैथुन करना हमारे समाज में बहुत आम बात है चाहे वो शादीशुदा व्यक्ति हो या कुंवारा|कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार कम से कम ९७ प्रतिशत पुरुष और ८० प्रतिशत महिलाये हस्थमैथुन करती है |इसके अलावा डेनिस कून द्वारा लिखी किताब -“मॉडल्स फॉर एक्टिव लर्निंग ” के अनुसार ७० प्रतिशत विवाहित पुरुष अक्सर हस्थमैथुन करते है|

लेकिन इस बात का इतना आम होने बावजूद लोग इसकी बात खुले में नहीं करते क्युकी कई लोग सेक्स से जुड़े पहलुओं पे बात करने को समाज में हीन भावना से देखते है और हस्थमैथुन जैसे कृत्य को निषेध इस लिए मानते है क्युकी हस्थमैथुन करने के बाद अक्सर अपराध बोध होता है |
पुरुष ख़ास कर हस्थमैथुन की आदत से काफी घबराते है और उनके मन में हमेशा यह दर रहता है की कही वह ज्यादा हस्थमैथुन तो नहीं कर रहे है ?कही ऐसा करने से उनकी सहित पे कोई बुरा असर तो नहीं पड़ेगा ?कही उनकी सेक्स लाइफ पर इसका बुरा असर तो नहीं पड़ेगा ?या फिर कही उन्हें किसी प्रकार की मानसिक बीमारी तो नहीं हो गयी है ?
आज हम अपने लेख में इन्ही सब समस्याओं पर बात करेंगे और इनको हल करने की भी कोशिश करेंगे

 

हस्थमैथुन, यौनांगो को स्वयं उत्तेजित करने की प्रक्रिया है |कई मनोवैज्ञानिक और स्वास्थ विशेषज्ञों का मानना है की हस्थमैथुन एक सामान्य आदत है |इस प्रक्रिया के माध्यम से आपको अपनी यौन प्रकृति और व्यव्हार के बारे में बहुत कुछ जानने को मिलता है और यह अपने यौन तनाव को कम करने का एक अच्छा साधन है|यह प्रक्रिया रोग में तब बदल जाती है जब इसके कारण आपके काम करने के तरीके में परेशानी आने लगे या इसका असर पारस्परिक सम्बन्धो में पड़ने लगे|बहुत कम लोगो में हस्थमैथुन की प्रक्रिया एक रोग का रूप ले लेती है |हलाकि बाध्यकारी रूप से हस्थमैथुन करने को एक लत के रूप में देखा जाता है लेकिन अगर आपको यह लगता है की किसी भी काम में आपकी यह आदत बाधा नहीं पंहुचा रही है तो आपको हस्थमैथुन की आदत से नहीं डरना चाहिए |

वीर्यपात की संख्या और स्वास्थय

कई पुरुष इस बात से घबराते है की दिन या हफ्ते में कई बार वीर्यपात के करण उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ता है |एक वैज्ञानिक प्रकाशन में यह पाया गया है की जो व्यक्ति हफ्ते में अवसात रूप से ५ या ज्यादा बार वीर्यपात करता है उसे प्रोस्ट्रेट कैंसर होने की कम सम्भावना होती है|

एक हफ्ते में कितना हस्थमैथुन सामान्य माना जाता है ??

वैज्ञानिक रूप से यह तो नहीं पता चल पाया है की हफ्ते में कितनी बार हस्थमैथुन करना सामान्य माना जाता है |हलाकि इस बात का एक प्रमुख मापदंड यह है की इसका आपके शरीर और व्यवहार पे क्या असर पड़ रहा है ? क्या आपको रोजमर्रा के काम में कोई दिकत हो रही है ? अगर आप अपने आपसे यह सारे प्रश्न पूछेंगे तो आपको यह जानने में सहायता मिलेगी की आपकी यह आदत स्वास्थ के लिए सही है की नहीं |इसके आलावा हम यह कह सकते है की कोई व्यक्ति जितना चाहे हस्थमैथुन कर सकता है |

 

 

 

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