अनियमित मासिकधर्म और पी.सी.ओ.डी की बीमारी

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मासिकधर्म ( माहवारी )
मासिक धर्म लड़कियों की एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है, |माहवारी या पीरियड लड़कियों में १० से १६ वर्ष की आयु में शुरू होता है|इस चक्र के दौरान शरीर में हार्मोनल बदलाव होते है जो की महिलाओ को गर्भ धारण करने की छमता प्रदान करते है |

इसे मासिकधर्म इसलिए कहते है क्युकी चक्र महीने में एक बार होता है |हर महिला में इसकी अवधि अलग होती है लेकिन ज्यादातर इसकी अवधि २१ से ३५ दिन की होती (औसत २८ दिन )|

अनियमित मासिकधर्म के प्रकार:

मासिकधर्म में होने वाले स्त्राव को अनियमित तब कहते है जब उसके होने की आवृत्ति २१ दिन से बढ़ जाये या ८ दिन से ज्यादा चले
कई बार स्त्राव नहीं भी होता है या फिर पहले और बाद में होता है यह सारे भी मासिकधर्म की अनिमियता माने जाते है |मासिकधर्म चक्र बहुत सारे कारको पर निर्भर करता है जिसमे की कुछ आम कारक है हार्मोनल अस्तर और गर्भाशय की स्थिति |
मासिकधर्म चक्र में असमानता कई कारणों से आ सकती है इसलिए हर बार हम किसी अनियमिता के लिए पाली सिस्टिक ओवेरियन डिजीज(पी.सी.ओ.डी) को जिम्मेदार नहीं बता सकते|

पॉली सिस्टिक ओवेरियन डिजीज
पॉली सिस्टिक ओवेरियन डिजीज एक हार्मोनल बीमारी है जो लड़कियों और औरतो में होती है इससे जुड़े कई लक्षण है यह गलत जीवनशैली से होने वाली बीमारी है और इसके कारण गर्भाशय में गांठ भी हो सकती है|इससे बचने के लिए चिकित्सक अक्सर जीवनशैली में सुधर करने के लिए बोलते है |

पी.सी.ओ .डी के कुछ सामान्य लक्षण है जैसे :

  •  मुहासे
  • वजन बढ़ना
  • चेहरे पर बाल निकलना
  • अनियमित मासिकधर्म ,कई औरतो में मासिकधर्म नहीं भी होता है और कई स्थितियों में सामान्य से ज्यादा खून का स्त्राव होता है
  • अवसाद

अनियमित मासिकधर्म : निदान
स्त्रीरोग विशेषज्ञ कई बार मरीज का सोनोग्राफी कर के पता लगाते है और इसके साथ हे साथ खून की जाँच भी की जाती है|

अनियमित मासिकधर्म के १५ से २० प्रतिशत मामलो में पी.सी.ओ.डी ही जिम्मेदार होती है मगर बाकि बचे ८० से ८५ प्रतिशत मामलो में अन्य बहुत सारे कारक भी होते है जिनका सही समय पे निदान बहुत आवश्यक है|

अगर आपको अनियमित मासिकधर्म की समस्या है तो सही समय पर इसका निदान करवाए और अपने नज़दीक की स्त्री-रोग विशेषज्ञ से परामर्श करे |

 

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