नशा और नशे की लत में अंतर

0
102
नशा

नशा मूल रूप से किसी नशीले पदार्थ के सेवन को संदर्भित करता है। जब कोई व्यक्ति शराब या नशीले पदार्थों को बड़ी मात्रा में लेता है,तो इसके परिणामस्वरूप उसके व्यवहार में परिवर्तन हो जाता है जैसे कि जोर से बात करना, अनावश्यक रूप से हसना ,मामूली बेहोशी, बोलने की स्पष्टता न होना आदि।ऐसा होने पर व्यक्ति नशे की चरम सीमा तक पहुंच जाता है, और इस पूरी प्रक्रिया को नशा करना कहते है |

एक व्यक्ति जो नशा करता है, यह जरुरी नहीं की वह नशे का आदि है या उसे नशे की लत हो चुकी है,बल्कि यह इस बात पर निर्भर करता है कि क्या वह नियमित आधार पर नशीले पदार्थ का सेवन करता है ?लेकिन हम इस बात से भी इंकार नहीं कर सकते की थोड़ी-थोड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ का सेवन करना ही आगे चल कर नशे की लत में बदल जाता है |

आइये देखते है की हमारी मनोचिकित्सक को इस बारे में क्या कहना है :-

नशे की लत

लत, किसी चीज़ को पाने की वो तीव्र इक्षा है जो व्यक्ति को बार-बार उस वस्तु का उपभोग करने के लिए विवश करती है, और अक्सर ऐसा नशीले पदार्थ के साथ भी होता है| नशे की लत में व्यक्ति इतना मजबूर हो जाता है की वह नशा करने के लिए कुछ भी करने को त्यार हो जाता है और यह लत एक बुरी आदत में बदल जाती है| एक व्यक्ति जिसे नशा करने की लत हो चुकी है वह अपनी नशा करने की इक्षा को दबा नहीं पाता और जब उसे नशीला पदार्थ नहीं मिलता है तो उसे शारीरिक और मनोवैज्ञानिक रूप से हानि पहुँचती है |

नशे की लत को समझने के कई मापदंड है, उनमे से कुछ प्रमुख इस प्रकार है :-

  • पहला मापदंड यह है की नशे की लत से ग्रस्त व्यक्ति नशा करने की तीव्र इक्षा को शांत नहीं कर पाता और जब तक नशा कर नहीं लेता तब तक व्याकुल रहता है |
  • अगर व्यक्ति नशीले पदार्थ का सेवन नहीं करता है तो उसे मानसिक और शारीरिक अस्तर पर एक अजीब व्याकुलता होती है और यह सिर्फ दवाइया लेने पर हे शांत होती है|
  • मादक पदार्थ के लिए सहनशीलता: अगर कोई व्यक्ति नशीले पदार्थ का सेवन करना इसलिए बढ़ा देता है क्युकी उसको नशीले पदार्थ की पुरानी मात्रा में वही संतुष्टि नहीं मिल प् रही है तो ऐसी स्थिति में कहा जाता है की उस व्यक्ति ने नशीले पदार्थ के लिए सहनशीलता विकसित कर ली है |

उपरोक्त तीन मापदंडो के अलावा और भी मापदंड उपलब्ध है जिससे हम पाता लगा सकते है की व्यक्ति को नशे की लत लग चुकी है या नहीं |यह सारे मापदंड कुछ इस प्रकार है :

  • नशे की लत में पड़ा व्यक्ति जीवन की और सारी जरुरी गतिविधियों को छोड़ कर सिर्फ नशीले पदार्थ के बारे में सोचता है और उसे ऐसा लगता है की सिर्फ नशा करने से ही उसे जीवन में ख़ुशी मिल सकती है |
  • लत में पड़े व्यक्ति का पूरा जीवन सिर्फ नशे के आसपास हे घूमता रहता है| उदाहरण के तौर पर वह सिर्फ यही सोचता रहता है की उसे नशीला पदार्थ (शराब/अन्य नशीले पदार्थ )बाजार से कैसे खरीदना है और घर पहुंचते ही जल्दी से जल्दी उसका सेवन कैसे किया जा सकता है |
  • नशे में पड़ा व्यक्ति सारी शारीरिक और सामाजिक बंधन जो उससे नशा करने से रोकती है उसे पार कर सिर्फ नशा करना चाहता है|

उदाहरण के तौर पर :
अगर नशा करने से व्यक्ति को उलटी होती है या फेफड़े ख़राब हो जाते है तब भी वह नशे का उपभोग करना नहीं छोड़ता है |
दूसरा उदाहरण यह है की अगर समाज व्यक्ति को मन करता है नशा करने से तो वह नशा करना तो बंद नहीं करता बल्कि समाज और रिश्तेदारों से हे मुँह मोड़ लेता है|

ऊपर कही गयी सभी बातो से यही साबित होता है की नशा करने में और नशे की लत में अंतर तो है लेकिन यह अंतर इतना बारीक़ है की व्यक्ति कब नशा करते करते नशे का आदी हो जाता है उसके खुद पाता नहीं चलता इसलिए नशा करने से इंसान को बचना चाहिए |

 

 

शेयर करें

कोई टिप्पणी नहीं है

कोई जवाब दें